भारत में राइड-हेलिंग सेवाओं जैसे ओला और उबर का बहुत बड़ा बाजार है, लेकिन इसमें कई समस्याएँ भी सामने आई हैं, जैसे कि ड्राइवरों की कमाई पर कंपनियों का अत्यधिक नियंत्रण, ऊंचे कमीशन और उपभोक्ताओं के लिए अधिक किराया। इन सभी मुद्दों को हल करने के लिए सरकार ने ‘सहकार टैक्सी सेवा‘ शुरू करने की योजना बनाई है। यह एक सहकारी मॉडल पर आधारित होगी, जिससे टैक्सी चालकों को अधिक लाभ मिलेगा और उपभोक्ताओं को किफायती सेवाएँ मिलेंगी।
सहकार टैक्सी सेवा क्या है?
‘सहकार टैक्सी सेवा‘ एक सरकारी पहल है, जिसका उद्देश्य देशभर के टैक्सी, ऑटो-रिक्शा और दोपहिया राइडर्स को एक ऐसा प्लेटफॉर्म देना है, जहां वे कमाई का बड़ा हिस्सा खुद रख सकें। इस सेवा में ड्राइवर सहकारी समितियों का हिस्सा होंगे, जिससे वे बड़े कॉर्पोरेट्स की तुलना में अधिक लाभ अर्जित कर सकेंगे।
इस सेवा के फायदे
- ड्राइवरों के लिए अधिक कमाई – ओला और उबर जैसे प्लेटफार्मों में ड्राइवरों को अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा कमीशन के रूप में देना पड़ता है, जबकि सहकार टैक्सी सेवा में यह राशि काफी कम होगी।
- यात्रियों के लिए किफायती किराया – सहकार सेवा में बिचौलियों की भूमिका कम होने के कारण किराया कम होगा और यात्रियों को किफायती राइड मिलेगी।
- स्थानीय रोजगार को बढ़ावा – यह सेवा अधिक से अधिक स्थानीय चालकों को रोजगार देगी और उनकी आजीविका को सुरक्षित बनाएगी।
- सुरक्षित और विश्वसनीय सेवा – सरकारी निगरानी के कारण सुरक्षा और सेवा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- ड्राइवरों के अधिकारों की सुरक्षा – चूंकि यह सेवा सहकारी मॉडल पर आधारित होगी, इसलिए ड्राइवरों के अधिकारों और हितों की रक्षा बेहतर तरीके से की जाएगी।
कैसे करें रजिस्ट्रेशन?
सहकार टैक्सी सेवा में रजिस्ट्रेशन के लिए इच्छुक चालकों को अपने राज्य की सहकारी समितियों से संपर्क करना होगा। सरकार इस योजना के तहत विशेष पोर्टल और मोबाइल ऐप भी लॉन्च कर सकती है, जिससे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया जा सके।
क्या यह ओला और उबर को टक्कर दे पाएगी?
हालांकि, ओला और उबर का बाजार बहुत बड़ा है और उनके पास उन्नत तकनीक और मार्केटिंग रणनीतियाँ हैं, लेकिन सहकार टैक्सी सेवा अपने कम किराए, ड्राइवर-फ्रेंडली मॉडल और सरकारी समर्थन के कारण इन कंपनियों को कड़ी टक्कर दे सकती है। यदि सरकार इसे सही ढंग से लागू करती है, तो यह सेवा पूरे देश में परिवहन प्रणाली को एक नया स्वरूप दे सकती है।
निष्कर्ष
सहकार टैक्सी सेवा न केवल ड्राइवरों के लिए एक बड़ा अवसर है, बल्कि यात्रियों के लिए भी यह एक किफायती और भरोसेमंद विकल्प साबित हो सकती है। सरकारी पहल होने के कारण इसमें सुरक्षा, कम शुल्क और पारदर्शिता की संभावना अधिक है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सेवा ओला और उबर जैसी बड़ी कंपनियों के सामने कैसे प्रदर्शन करती है।
Reference: https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2116479